ईरान की नाकाबंदी से Global Oil Supply पर खतरा, भारत की बढ़ी टेंशन

सैफी हुसैन
सैफी हुसैन, ट्रेड एनालिस्ट

Middle East में हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। ईरान ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री पट्टी हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को रेडियो मैसेज भेजकर चेतावनी दी जा रही है कि वे आगे न बढ़ें। यह वही संकीर्ण समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है चौड़ाई महज करीब 50 किलोमीटर। रणनीतिक रूप से देखें तो यह “Global Energy Artery” है।

Global Energy Market के लिए क्यों बड़ा झटका?

अमेरिकी ऊर्जा एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है जो वैश्विक खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है। इसके अलावा दुनिया की लगभग 20% LNG सप्लाई भी इसी समुद्री कॉरिडोर से ट्रांजिट होती है, जिसमें कतर का बड़ा योगदान है।

अगर यह नाकाबंदी लंबी चली, तो Oil Futures में उछाल, Shipping Insurance Cost में बढ़ोतरी और Supply Chain Disruption तय माना जा रहा है।

“दुनिया की गाड़ी पेट्रोल से नहीं, हॉर्मुज से चलती है।”

भारत की बढ़ सकती है टेंशन

India के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। Shipping data के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल इसी रूट से आयात करता है।

हाल के महीनों में रूस से सप्लाई में बदलाव के बाद भारत ने इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से खरीद बढ़ाई थी। अनुमान है कि रोजाना 25–27 लाख बैरल तेल भारत इसी मार्ग से मंगाता है।

अगर मार्ग बंद रहा तो Domestic Fuel Prices पर सीधा असर पड़ सकता है। यानी Middle East की हलचल का झटका सीधे भारतीय पेट्रोल पंप तक महसूस होगा।

Strategic Signalling या Power Play?

ये कदम US-Israel airstrikes के जवाब में Strategic Signalling है। अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने यह दिखाने की कोशिश की है कि Gulf की ‘चाबी’ अभी भी उसके हाथ में है।

हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह ब्लॉकेड लंबा चलेगा या सिर्फ दबाव की रणनीति है? Gulf देशों के पास वैकल्पिक पाइपलाइन विकल्प हैं, लेकिन उनकी क्षमता सीमित है।

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